Chandrayaan-3 Latest News In Hindi | चंद्रयान-3 अभी कहां है?

नमश्कार दोस्तों! आज कि हमारी पोस्ट Chandrayaan-3 Latest News In Hindi में हम जानेगे कि ISRO (Indian Space Research Organisation) का Chandrayaan-3 अभी कहां है? और यह मिशन अब तक क्या-क्या सफलताएं हासिल कर चुका है?

अब जब भी कभी भारत की स्पेस एजेंसी ISRO के सफल मिशंस कि एक लिस्ट बनाई जाएगी, तो उसमें Chandrayaan-3 मिशन का नाम सबसे ऊपर आएगा। 23 अगस्त 2023 श्याम 06:04 मिनट पर chandrayaan-3 ने चांद के साउथ पोल रीजन में सॉफ्ट लैंडिंग करके जो इतिहास रचा है, उसकी चर्चा आज पूरी दुनिया कर रही है। और chandrayaan-3 पर उतरना भारत की एकमात्र ही कामयाबी नहीं है बल्कि बेहद किफायती बजट के साथ यह कर दिखाना सबसे बड़ी कामयाबी है।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

मात्र 615 करोड़ रुपिया बजट के साथ लॉन्च हुआ chandrayaan-3 आज चंद्रमा के उस क्षेत्र में है, जहां जाने की कोशिश में रूस का 1,650 करोड़ रुपया बजट वाला LUNA 25 दुर्भाग्यवश 20 अगस्त 2023 को क्रेश लैंड कर गया था। चांद पर उतरने की कोशिश करना भारत के लिए भी कोई कम चुनौतीपूर्ण नहीं रहा है। chandrayaan-2 के साथ भारत चांद पर उसी जगह उतरने की कोशिश पहले भी कर चुका है जहां वह chandrayaan-3 के साथ अब पहुंचा है।

अगर सब कुछ सही जाता तो साल 2019 में ही भारत चांद के साउथ पोल रीजन पर उतर चुका होता। अगर आपको ध्यान हो तो 6 सितंबर 2019 में chandrayaan-2 का लैंडर और रोवर आखरी वक्त में सॉफ्टवेयर ग्लित्च के चलते क्रेश लैंड कर गया था। chandrayaan-2 में Vikram लैंडर और Pragyan रोवर के साथ ऑर्बिटर भी शामिल था। chandrayaan-2 का ऑर्बिटर चांद को आज भी सही सलामत ऑर्बिट कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए chandrayaan-3 में लेंडर और रोवर को ही शामिल किया गया है। जिसमें Vikram लैंडर chandrayaan-2 के ऑर्बिटर के साथ संपर्क साधने में समर्थ है।

Chandrayaan 3 vs Chandrayaan 2

आइए अब जाने की कोशिश करते हैं की chandrayaan-3, chandrayaan-2 से बेहतर कैसे है? क्या आपको पता है- इसरो ने chandrayaan-2 के लिए इस्तेमाल किए गए “success-based design” के बजाय chandrayaan-3 के लिए “failure-based design” को अपनाया। कहने का मतलब है कि chandrayaan-3 मिशन के दौरान ISRO का ध्यान संभावित failure points की पहचान करने, जिन कारणों के चलते chandrayaan-2 क्रेश कर गया था और चाँद पर सफल successful landing करने के लिए, सुरक्षा उपायों को लागू करने पर था।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

अब, अपने chandrayaan-2 की विफलता से सीखते हुए, ISRO ने इस बार सफलता सुनिश्चित करने के लिए chandrayaan-3 में कई सुधार किए थे। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:-

Landing Area: Chandrayaan-3 के लिए Landing Area बड़ा किया गया था। Chandrayaan-2 के लिए जहाँ ये लैंडिंग एरिया specific 500 मीटर x 500 मीटर था, जहाँ इसको पहुँचाने कि कोशिश की गयी थी, वहीँ chandrayaan-3 मिशन को 4 किमी x 2.4 किमी क्षेत्र में कहीं भी सुरक्षित रूप से उतरने के निर्देश दिए गए थे। मतलब इसके पास उतरने के लिए बहुत बड़ा area था।

Strengthened Legs: Chandrayaan-3 के Vikram लैंडर के पैरों को मजबूत किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह 108 किमी/घंटा की गति से भी उतरने और स्थिर रहने में सक्षम हो।

More Fuel: यह भी सुनिश्चित किया गया था कि जरूरत पड़ने पर अपनी लैंडिंग साइट में आखिरी मिनट में बदलाव करने के लिए Vikram लैंडर की क्षमता को बढ़ाने के लिए Chandrayaan-3 के लैंडर के पास चंद्रयान -2 की तुलना में अधिक ईंधन हो।

Solar Panels: Chandrayaan-3 लैंडर में चारों तरफ सौर पैनल हैं, जबकि Chandrayaan-2 में केवल दो थे। यह design modification लैंडर को सौर ऊर्जा का उपयोग continue रखने में सक्षम बनाता है, भले ही वह गलत दिशा में उतरता या गिरने का अनुभव करता, किसी भी हालात में।

More Instruments: Chandrayaan-3 में, लैंडर की गति की लगातार निगरानी करने और जरुरी सुधार करने के लिए अतिरिक्त navigational और guidance instruments शामिल किये गए थे।

Updated Software: Chandrayaan-3 के लिए खतरे का पता लगाने और बचाव करने वाले कैमरे, processing algorithm और navigation और guidance software में जरुरी upgrades किए गए थे। यह गारंटी देने के लिए कि किसी भी विफलता या खराबी के मामले में alternative systems मौजूद हों, सुरक्षा की दृष्टि से मिशन में इस बार कई परतें लागू की गई थीं।

Multiple Stress Tests: इस बार Vikram लैंडर को कई stress tests और experiments से भी गुजरना पड़ा था। ISRO ने lunar landing conditions को simulate करने के लिए अपनी facilities में कई प्रकार के test beds बनाए थे। 

इन सब जरूरी सुधारों का ही नतीजा रहा कि जहां chandrayaan-2 चाँद की सतह से महज 2.2 किमी ऊपर Software Malfunction के चलते अपने Fine Braking Phase के दौरान क्रेश लैंड कर गया था, वहीँ  Chandrayaan-3 अपने सभी जरुरी Phases जिनमे initial preparation, velocity reduction, orientation change, attitude hold phase, fine braking, final descent, और touchdown शामिल थे, उनको बिना किसी समस्या के पार करते हुए चाँद की सतह पर 23 अगस्त 2023 को अपनी तय लैंडिंग साइट यानी South Pole Region पर शाम 6:04 मिनट पर उतर गया। वह जगह जहाँ अब तक दूसरा और कोई भी देश उतरने में सक्षम नहीं हो सका है।

Chandrayaan-3 Payloads Information

Propulsion Module Payload

  • Spectro-polarimetry of HAbitable Planet Earth (SHAPE):- यह उपकरण हमे परावर्तित प्रकाश (reflected light) में बेहद छोटे ग्रहों की भविष्य की खोजों की जांच करने की अनुमति देगी जो रहने योग्य (या जीवन की उपस्थिति के लिए) योग्य होंगे।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

Lander payloads

  • Chandra’s Surface Thermophysical Experiment (ChaSTE):- इस उपकरण का उपयोग चाँद की सतह का तापमान और तापीय चालकता (thermal conductivity) को मापने के लिए किया जायेगा।
  • Instrument for Lunar Seismic Activity (ILSA):- इस उपकरण का उपयोग landing site के आसपास भूकंपीयता को मापने के लिए किया जायेगा।
  • Radio Anatomy of Moon Bound Hypersensitive Ionosphere and Atmosphere (RAMBHA) Or Langmuir Probe (LP):- इस उपकरण का उपयोग प्लाज्मा घनत्व और इसकी विविधताओं का अनुमान लगाने के लिए किया जायेगा।
  • LASER Retroreflector Array (LRA):- यह Moon System के dynamics को समझने के लिए एक passive experiment है।

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Rover payloads

  • Alpha Particle X-ray Spectrometer (APXS) and Laser Induced Breakdown Spectroscope (LIBS) उपकरण का उपयोग landing site के आसपास मौलिक संरचना (elemental composition) प्राप्त करने के लिए किया जायेगा।

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Chandrayaan 3 Mission Updates

चाँद के South Pole Region कि और उतरने के तुरंत बाद ही, अब Chandrayaan-3 अपने काम पर लग चुका है। chandrayaan-3 के विक्रम लैंडर ने उतरते ही चाँद कि सतह कि इस Image को साझा किया। और तो और 10:04 मिनट पर Pragyan रोवर, Vikram लैंडर से भी बहार आता हुआ भी दिखाई दिया। रोवर अबतक 8 मीटर चल भी चुका है। जिसे आप ऊपर विडियो में देख पाएंगे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रज्ञान रोवर को लेंडर से संपर्क बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा 500 मीटर रहना होगा।

Chandrayaan-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के सभी Payloads को चालू कर दिया गया है। ISRO ने विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित कर लिया है और तो और 24 अगस्त 2023 को ISRO ने अपने टि्वटर हैंडल पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान विक्रम लैंडर जब चांद की सतह पर उतर रहा था उसका फुटेज भी रिलीज किया। जिसे आप ऊपर लिंक कि गयी विडियो में देख पाएंगे।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

August 27, 2023

Chandrayaan-3 के विक्रम लैंडर के उपकरण Chandra’s Surface Thermophysical Experiment (ChaSTE) ने चंद्रमा की सतह के थर्मल व्यवहार को समझने के लिए ध्रुव के चारों ओर चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी के तापमान प्रोफाइल को मापा है। इसमें एक temperature probe जुड़ा हुआ है जो सतह के नीचे Drill करते हुए 10 सेमी की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। probe में 10 individual temperature sensors लगे हैं।

इस ग्राफ में हम देख सकते हैं कि अलग-अलग गहराई पर तापमान में उतार-चढाव आए हैं। चाँद के दक्षिणी ध्रुव के लिए यह पहली ऐसी प्रोफ़ाइल है। और ज्यादा डाटा आना अभी बाकी है।

August 28, 2023

चंद्रयान-3 रोवर पर लगे Laser-Induced Breakdown Spectroscopy (LIBS) उपकरण ने दक्षिणी ध्रुव के पास चाँद कि सतह की मौलिक संरचना पर पहली बार in-situ माप किया। ये in-situ माप ने स्पष्ट रूप से उस क्षेत्र में सल्फर (S) की उपस्थिति की पुष्टि कि, कुछ ऐसा जो ऑर्बिटर पर लगे उपकरणों द्वारा संभव नहीं था।

LIBS एक वैज्ञानिक तकनीक है जो सामग्रियों को तेज लेजर पल्स के संपर्क में लाकर उनकी संरचना का विश्लेषण करती है। एक High-Energy लेजर पल्स किसी material की सतह पर केंद्रित होती है, जैसे चट्टान या मिट्टी। लेजर पल्स एक बेहद गर्म और localized प्लाज्मा उत्पन्न करता है। जिसके बाद जुटाए गए प्लाज्मा प्रकाश को Charge Coupled Devices जैसे डिटेक्टरों द्वारा वर्णक्रमीय रूप से विघटित (क्रम में अलग हुए तत्व) और उनका पता लगाया जाता है। चूंकि प्रत्येक तत्व प्लाज्मा अवस्था में होने पर प्रकाश की wavelengths का एक characteristic set उत्सर्जित करता है, इसलिए material की मौलिक संरचना का पता लगाया जा सकता है।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

ग्राफ़िक रूप से दर्शाए गए प्रारंभिक विश्लेषणों ने चाँद सतह पर एल्युमीनियम (Al), सल्फर (S), कैल्शियम (Ca), आयरन (Fe), क्रोमियम (Cr), और टाइटेनियम (Ti) की उपस्थिति का खुलासा किया है। आगे के मापों से मैंगनीज (एमएन), सिलिकॉन (सी), और ऑक्सीजन (ओ) की उपस्थिति का पता चला है। और हाइड्रोजन की मौजूदगी को लेकर गहन जांच चल रही है।

August 30, 2023

Alpha Particle X-ray Spectrometer (APXS) कि observations ने एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम और आयरन जैसे महत्वपूर्ण expected features के अलावा, सल्फर सहित दिलचस्प छोटे तत्वों (minor elements) की खोज की। रोवर पर लगे LIBS उपकरण ने भी सल्फर की उपस्थिति की पुष्टि की थी। इन observations का Detailed scientific analysis जारी है।

August 31, 2023

दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर surface-bound Lunar plasma environment का पहला in-situ माप  Radio Anatomy of Moon Bound Hypersensitive ionosphere and Atmosphere – Langmuir Probe (RAMBHA-LP) पेलोड द्वारा किया गया, जो चंद्रयान -3 के लैंडर पर लगा एक payload है।

Langmuir Probe एक उपकरण है जिसका उपयोग प्लाज्मा को characterize करने के लिए किया जाता है। इसमें चंद्रयान-3 लैंडर के ऊपरी डेक से जुड़े 1-मीटर boom पर 5 सेमी metallic spherical probe लगाया गया है। लैंडर के lunar touchdown के बाद hold-release mechanism का उपयोग करके probe को deployed किया गया था। extended boom length यह सुनिश्चित करती है कि spherical probe, lander’s body से अलग होकर, undisturbed lunar plasma environment कि सीमाओं के अंदर रहते हुए संचालित होता रहे।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

शुरुवाती जांच से संकेत मिला है कि lunar surface को घेरने वाला प्लाज्मा अपेक्षाकृत कम घना है, जिसकी number density लगभग 5 से 30 मिलियन इलेक्ट्रॉन प्रति घन मीटर है। यह जांच मुख्य रूप से lunar daytime के शुरुआती चरणों से संबंधित थी।

Probe बिना किसी रुकावट के संचालित होता है, जिसका लक्ष्य पूरे lunar day के दौरान near-surface plasma environment में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाना था। और ऐसा इसने किया भी।

August 31, 2023

Instrument for Lunar Seismic Activity (ILSA) जो एक और payload है Chandrayaan-3 का जो चाँद पर Micro Electro Mechanical Systems (MEMS) technology-based instrument का पहला उदाहरण है। इसने रोवर और अन्य पेलोड की गतिविधियों के कारण होने वाले कंपन को रिकॉर्ड किया।

ILSA’s का primary objective चाँद पर प्राकृतिक भूकंपों, प्रभावों और कृत्रिम घटनाओं (artificial events) से पैदा होने वाली जमीनी कंपन को मापना है। 25 अगस्त, 2023 को रोवर के नेविगेशन के दौरान रिकॉर्ड किए गए कंपन को चित्र में दर्शाया गया है। इसके अलावा, 26 अगस्त, 2023 को रिकॉर्ड की गई एक घटना, जो स्वाभाविक प्रतीत होती है, भी दिखाई गई है। इस घटना के स्रोत की अभी जांच चल रही है।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

September 2, 2023

ISRO का कहना कि लैंडर के जरिए धरती तक डेटा पहुंचाने वाले payloads बंद कर दिए गए हैं। Indian Space Research Organisation (ISRO) ने शनिवार September 2, 2023 को कहा कि चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर को निष्क्रिय (sleepmode) कर दिया गया है। ऐसा इसलिए क्यूंकि चाँद के जिस हिस्से पर लैंडर और रोवर मौजूद हैं वहां अब अँधेरा होने लगा है, जिससे सोलर पेनल्स चार्ज नही हो सकेंगे। अंतरिक्ष एजेंसी अब 14 दिन बाद, 22 सितंबर, 2023 को रोवर के जगाने की उम्मीद कर रही है। चाँद पर लगभग 14 दिन रात और 14 दिन, दिन रहता है।

September 4, 2023

लैंडर और रोवर स्लीप मोड मे जा चुके हैं। 22 सितंबर, 2023 के आसपास उनके जागने की प्रतीक्षा कि जा रही है।

Why Chandrayaan 3 Landed On South Pole of Moon

अब सवाल मन में आ सकता है कि बाकी देशों की तरह चांद के इक्वेटर पर ना उतरकर इसरो ने chandrayaan-3 के साथ, साउथ पोल रीजन में उतरने का ही फैसला आखिर क्यों किया? Well तो ऐसा माना जाता है कि water-ice के reserves चंद्रमा की सतह के नीचे दबे हुए हैं, खासकर दोनों ध्रुवों के नीचे, यही एक और कारण है कि तमाम space agencies ध्रुवीय क्षेत्रों पर इन water-ice के reserves का पता लगाने के लिए उत्सुक हैं।

Chandrayaan-1 के Moon Impact Probe ने चंद्रमा की परत के नीचे पानी के अणुओं की उपस्थिति के संकेत दिए थे। इसलिए, space research organizations का इरादा चाँद के ध्रुवों पर अंतरिक्ष यान भेजकर और चाँद कि सतह पर प्रयोग करके इस खोज को गहराई से जानना चाहती हैं। और अब इस दिशा में chandrayaan-3 सबसे पहले उतरकर खोज शुरू करने की ओर अग्रसर है। 

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi

चाँद के ध्रुव काफी डार्क हैं, इनकी topography और geology काफी unique है, और पानी के molecules बर्फ के रूप में यहां कहीं लाखों-करोड़ों सालों पहले से बचे हो सकते हैं। ऊपर-ऊपर से और दूर से orbiters द्वारा इन ध्रुवों कि observations कई बार की जा चुकी है, जिनमें से ज्यादातर ने चंद्रमा की सतह के नीचे water-ice reserves के बचे और छुपे होने की संभावना के संकेत दिए हैं।

अगर यह water-ice reserves हमें मिल जाते हैं जिनकी संभावना ज्यादा है तो भविष्य में चांद पर कॉलोनी बनाकर इन water-ice reserves को इस्तेमाल में लिया जा सकता है। अब अगले 14 दिनों तक प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर घूमते हुए अपने instruments के जरिए चांद की सतह को खंगालने वाला है और chandrayaan-3 वह पहला मिशन होने जा रहा है जो चंद्रमा के साउथ पोल रीजन में घूमते हुए इस और के गहरे राज को पूरी दुनिया के सामने रखेगा।

Chandrayaan-3 Latest News In Hindi (Conclusion)

तो आज कि यह पोस्ट Chandrayaan-3 Latest News In Hindi में हम जान चुके हैं कि Chandrayaan-3 अब अपने mission को शुरू कर चुका है। और अगले 14 दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। निश्चित तौर पर चंद्रयान-3 की सफलता भारत के space programs के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है और चाँद के बारे में हमारी समझ को आगे बढ़ाने में मदद करने वाली है। यह मिशन आगे चलकर deep space exploration में भारत की क्षमताओं को भी प्रदर्शित करने वाला है और चाँद और अन्य ग्रहों पर भी भविष्य के मिशनों के लिए रास्ता खोलेगा।

ISRO ने बेहद किफायती बजट में रहते हुए chandrayaan-3 को चाँद कि सतह पर लैंड कराकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है और ऐसा हमने कोई पहली बार भी नहीं किया है, लगभग 450 करोड़ रुपए में मंगलयान को मंगल की ऑर्बिट में पहली ही बार में पहुंचा कर, यह कारनामा हम पहले ही कर चुके हैं।

अब आपका फर्ज बनता है कि आप कमेंट में एक बार हमारे वैज्ञानिकों के लिए जय हिन्द जरूर लिखें। बहराल हाल ही में वैज्ञानिकों ने सौरमंडल में सबसे बड़े महासागर का पता लगा लिया है और यह हमें मिला है जुपिटर की गहराइयों में, इस खबर पर ज्यादा जानकारी के लिए यहां पर क्लिक करें।

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FAQ’s About Chandrayaan-3

1. What is current status of Chandrayaan-3?

Ans. चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है। और अब वह अपने वैज्ञानिक उपकरणों को चालू कर चुका है। इस मिशन कि समय सीमा 14 दिनों कि रहने वाली है।

2. What is the cost of Isro Chandrayaan-3?

Ans. चंद्रयान 3 को लॉन्च करने का पूरा खर्चा तकरीबन 615 करोड़ रुपया आया है। जो कि कई हॉलीवुड मूवीज से भी कम है। इसलिए भी यह मिशन बहुत कामयाब कहा जा सकता है।

3. Is Chandrayaan-3 a manned mission?

Ans. नहीं! चंद्रयान 3 एक लैंडर और रोवर मिशन है। जो अगले 14 दिनों तक सक्रीय रहने वाला है।

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