तारों की इतनी किस्म हैरान कर देगी आपको | Stellar Classification in Hindi

Stellar Classification in Hindi

आज की हमारी पोस्ट Stellar Classification in Hindi में हम एक ऐसी सीरीज शुरू करने जा रहे हैं जिसमे हम जानेंगे कि ब्रह्मांड में तारों कि ये किस्मे कितने प्रकार कि होती है। वे एक दूसरे से कितने अलग होते हैं? क्या खासियत उनको एक दूसरे से अलग बनाती है। तो दिन ढलते ही रात का आसमान, इन टिमटिमाते तारों की मौजूदगी में हमें अपनी और आकर्षित करने लगता है। वो बात अलग है कि शहरों और बड़े महानगरों में Light pollution के चलते यह तारे आसमान में अब कहीं गुम से होने लगे हैं।

लेकिन शहरों से दूर गांव और कस्बों में आज भी यह अनगिनत तारे रात के आसमान में टिमटिमाते हुए देखे जा सकते हैं। पृथ्वी से तो यह एक जैसे ही नजर आते हैं मगर हकीकत में यह अलग-अलग आकार और प्रकार में मौजूद हैं। हाल ही में इन तारों को जिस system में classified किया गया है वह system Morgan–Keenan (MK) system कहलाता है। इस system को सन 1943 में W.W. Morgan और P.C. Keenan ने दिया था।

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जिसके तहत सभी तारों को सबसे गर्म से सबसे ठंडे के तहत letters O, B, A, F, G, K, और M के sequence में रखा गया है। जिसमें हर लेटर को आगे सब डिवाइडेड किया गया है 0 से 9 नंबर तक, उस लेटर के सबसे गर्म तारे से सबसे ठंडे तारे तक। इस क्लासिकल सिस्टम से अलग इस सीक्वेंस को और बढ़ाया गया है जिसमें क्लास D, S और C शामिल की गई है। दूसरे कुछ अलग तारों के लिए जैसे सफेद बोने तारे या कार्बन तारे।

इस Stellar classification series में चलिए आज बात करते हैं इस system कि पहली class, O के बारे में।

Facts About O Type Stars

O Class के तारे Morgan–Keenan (MK) system के तहत सबसे गर्म और सबसे चमकदार होते हैं। इस हद तक कि ये जो रौशनी उत्सर्जित करते हैं वह ज्यादातर अल्ट्रावायलेट रेंज में होती हैं। यह सभी प्रकार के main-sequence तारों में, ब्रह्मांड में सबसे दुर्लभ तारे होते हैं। main-sequence तारे वे तारे होते हैं जो hydrogen से helium burning फेज में होते हैं, कोर में होने वाली nuclear fusion के चलते।

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इन तारों को main-sequence फेज में ढूंढ पाना कितना दुर्लभ होता है इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि हमारे सूर्य के तकरीबन 30 लाख करीबी पड़ोसी main-sequence तारों में से इन O-type तारों के main-sequence फेज में होने की संख्या सिर्फ एक है। प्रतिशत में देखें तो (0.00003%), जो दिखता कि ये कितने दुर्लभ होते हैं।

कुछ सबसे ज्यादा भारी तारे इसी spectral class में मौजूद होते हैं। O-type के तारों कि surroundings यानी आस पास का वातावरण अक्सर बहुत जटिल होता है जिससे उनके स्पेक्ट्रा को माप पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

ये type के तारे अक्सर blue giant और blue supergiant होते हैं मतलब रंग में नीले होते हैं। इन तारों का सतही तापमान 30,000 से 50,000 डिग्री सेल्सियस तक होता है। वहीँ इन तारों की चमक हमारे सूर्य की चमक से 30 लाख से 50 लाख गुना तक हो सकती है और यह प्रकार के तारे हमारे सूर्य से 16 गुना से ज्यादा ही भारी तक हो सकते हैं।

और यह तारे सोलर रेडियस में हमारे सूर्य से 6.6 गुना से ज्यादा ही सोलर रेडियस रखते हैं। यह तारे अपना ईंधन बहुत जल्दी खर्च कर देते हैं जिस वजह से इनकी उम्र कुछ मिलियन वर्ष जितनी ही होती है। इस तरह के युवा तारे अक्सर हमारी आकाशगंगा और दूसरी आकाशगंगाओं कि spiral arms में देखने को मिलते हैं।

Stellar Classification in Hindi
O-type तारों के spectra में weak hydrogen lines देखी गयी हैं। क्योंकि यह तारे बहुत विशाल और भारी होते हैं जिस वजह से यह अपनी कोर में बहुत जल्दी हाइड्रोजन को जला लेते हैं। इनके spectra में ज्यादातर neutral helium यानी (He I) और singly ionized helium यानी (He II) देखने को मिली है।

Singly ionized helium से यहाँ मतलब यह है कि इसमें helium atom के 2 इलेक्ट्रान में से एक इलेक्ट्रान टक्कर के चलते atom से अलग हो जाता है जिसके चलते ही इसे singly ionized helium कहते हैं। और ये ही इन तरह के तारों के spectra में सबसे ज्यादा देखी गयी हैं।

अब जैसा कि ऊपर हमने जाना था की हर क्लास अपनी सब कैटिगरी में भी डिवाइडेड है 0 से 9 नंबर तक जिसमे 0 सबसे ज्यादा गर्म और 9 उस class का सबसे ठंडा तारा होगा। O class में देखें तो ये sequence (O0, O1, O2….O9) कुछ ऐसे बनेगा।

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अब 1943 में जब MK classification आया था तब ये sequence O5 से O9.5 तक था। फिर 1971 में O9.7 तक बढाया गया। 1978 में O4 और फिर आगे आज ये sequence O2, O3, और O3.5 भी है।

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Conclusion Of Stellar Classification in Hindi

तो ये थी Morgan–Keenan (MK) system द्वारा क्लासिफाइड class O के बारे में एक संक्षेप जानकारी। आने वाले पोस्ट्स में हम इस system कि दूसरी classes को भी जानेंगे। आपको यह जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट करके हमे जरुर बताएं साथ ही हमारी इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना ना भूलें। चलिए मिलते हैं अगली पोस्ट में तब तक के लिए ख्याल रखियेगा अपना, जय हिन्द।

अलग-अलग तारों से जुड़े कुछ जरुरी प्रश्न

तारे कितने प्रकार के होते हैं?

आज ज्यादातर सितारों को वर्तमान में O, B, A, F, G, K, और M अक्षरों का उपयोग करके मॉर्गन-कीनन (एमके) प्रणाली के तहत वर्गीकृत किया गया है। जिसके तहत ये तारे चमक, गर्मी और तापमान के आधार पर एक दूसरे से अलग दर्शाए गए हैं।

क्या O-Type सितारों में ग्रह हो सकते हैं?

O तारे इतने शक्तिशाली होते हैं कि वे अपनी circumstellar disk में गैस को तेजी से उड़ा देते हैं और डिस्क को ग्रहों के निर्माण के लिए पर्याप्त रूप से ठंडा होने से रोकते हैं।

हमारा सूर्य किस पारकर का तारा है?

हमारा सूर्य एक G2V क्लास या प्रकार का तारा है। ये प्रकार के तारे रंग में पीले सफ़ेद होते हैं और जीवन कि संभावनाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

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