5 सबसे अजीब सितारे जो ब्रह्मांड में खोजे गए | 5 Strange Stars In The Universe EP-1

Strange Stars In The Universe

नमश्कार दोस्तों! आज कि ब्लॉग पोस्ट में हम 5 Strange Stars In The Universe के बारे में जानेंगे। 5 ऐसे सबसे अजीब तारे जिन्होंने वैज्ञानिकों को अपनी खोज के साथ हैरान कर दिया था।

Well, तारे हमारे ब्रह्मांड में सबसे जरुरी खगोलीय पिंडों में से कुछ हैं। ये तारे ही हैं जिन्होंने पूरे ब्रह्मांड को रोशन किया हुआ है। ये चमकदार खगोलीय पिंड अपने आप में दिलचस्प हैं। हम अक्सर तारों को हाइड्रोजन और हीलियम के विशाल, गर्म, गोल भारी द्रव्यमान वाली किसी बॉल के रूप में सोचते हैं, हालांकि ऐसा हमेशा नहीं होता है। खगोलविदों ने ऐसे बहुत से तारों का पता लगाया है जो इन तारों को लेकर हमारी धारणाओं को पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं।

दो भागों कि इस series में हम ब्रह्मांड में मिले 10 ऐसे अजीबों-गरीब तारों के बारे जानेंगे जिन्होंने अपनी खोज के साथ वैज्ञानिकों को हैरान परेशान कर दिया था।

अंडे के आकार का तारा

अक्सर जब हम एक तारे के बारे में सोचते हैं तो हमारी कल्पनाओं में एक विशाल गोल, आग का गोला आता है। जाहिर सी बात है, लेकिन एक ऐसे तारे की कल्पना कीजिए जिसका आकार एक अंडे जैसा हो। जी हां कल्पना करने की जरूरत नहीं है ऐसा एक तारा हमारी आकाशगंगा में मौजूद है और यह हमारे सूर्य का काफी करीबी पड़ोसी तारा भी है।

हमसे महज 25 प्रकाश वर्ष दूर Lyra नक्षत्र की ओर इस तारे से मिलिए, ये है Vega तारा। यह तारा हमारे सूर्य से 2.1 गुना ज्यादा भारी 2.5 गुना तक ज्यादा बड़ा और उम्र में लगभग 45 करोड़ साल पुराना तारा है इसकी तुलना में हमारा सूर्य 450 करोड़ साल पुराना तारा है यानी कि ये एक काफी युवा तारा है। यह Lyra नक्षत्र की ओर सबसे लोकप्रिय तारा भी है। ऐसा मैं इसीलिए कह रहा हूं क्योंकि जितना खगोल वैज्ञानिकों की नजर हमारे सूर्य पर रहती है लगभग उतनी ही या कहें उससे ज्यादा वेगा तारे पर रहती है।

Strange Stars In The Universe

वेगा तारे की equator पर रोटेशनल स्पीड बहुत ज्यादा है इसी वजह से वेगा का आकार अजीब है। ये तारा critical velocity aka critical rotation यानी वो maximum rotational speed जिसको छूते ही एक तारा बिखर या टूट जायेगा, उस critical velocity कि 88 से 93 प्रतिशत गति को छू लेता है। ये तारा थोड़ा और तेज घूमता तो बिखर जाता। इसकी गति इतनी ज्यादा है कि ये महज 12.5 घंटों में अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा कर लेता है। वहीँ हमारा सूर्य इसे 27 दिन में पूरा करता है।

Equator पर ये गति ही कारण है जिससे वेगा तारा अपने ध्रुवों की तुलना में Equator पर 23 प्रतिशत अधिक चौड़ा हो गया है। इस असामान्य आकार ने Equator से इतनी ज्यादा ऊर्जा transferred कर दी है कि यह अपने ध्रुवों की तुलना में Equator पर 2,200 डिग्री सेल्सियस जितना तक (4,000 डिग्री फ़ारेनहाइट) ठंडा है।

दो विशाल तारे जो आपस में मिल रहे हैं

एक दशक से भी पहले, खगोलविदों ने हमारी पृथ्वी से 13,000 प्रकाश वर्ष दूर Camelopardalis (“जिराफ़”) नक्षत्र में एक विशाल तारे की खोज की थी। उन्होंने इस तारामंडल को MY Camelopardalis नाम दिया था। मूल रूप से, शौकीन खगोल वैज्ञानिकों ने सोचा था कि वे एक विशाल सितारा देख रहे हैं। लेकिन खगोलविदों को जल्द ही एहसास हुआ कि वे एक नही बल्कि दो विशाल सितारों को एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए देख रहे थे।

जी हाँ ये एक बाइनरी तारामंडल था या और स्पष्ट रूप से कहा जाये तो ये एक contact binary तारामंडल था। ये दोनों नीले दानवीय तारे एक दूसरे को छूते हुए एक दूसरे को इतने करीब से orbit कर रहे हैं कि ये महज 1.2 दिनों में ही एक दूसरे के इर्द गिर्द एक orbit को पूरी कर लेते हैं।

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और आपको बता दें कि ये दोनों कोई छोटे और हल्के तारे नही हैं। इन दोनों में सबसे बड़े तारे का द्रव्यमान जहाँ सूर्य से 38 गुना तक है तो छोटे तारे का द्रव्यमान भी सूर्य से 32 गुना तक है। खगोलविदों को बाद में एहसास हुआ कि ये बाइनरी तारे किसी दिन एक-दूसरे से जरुर टकराएंगे और सूर्य से 60 गुना ज्यदा भारी वाले एक विशाल मोंस्टर तारे को जन्म देंगे।

तारों का वातावरण पहले से ही एक दूसरे से interact कर रहा है। यह तब तक जारी रहेगा जब तक दोनों तारों के कोर अंततः एक में merged नहीं हो जाते। well खगोलशास्त्रियों को अभी ठीक-ठीक पता नहीं है कि उस समय क्या होगा जब इनके कोर टकरायेंगे। हालाँकि, उनका अनुमान है कि merger से एक बड़ा विस्फोट होगा जिससे बहुत ज्यादा ऊर्जा निकलेगी।

तारा जिसकी आकाशगंगा जैसी Spiral Arms हैं

जब हम spiral arms के बारे में सोचते हैं, तो हम Milky Way जैसी आकाशगंगाओं की कल्पना करते हैं। हालाँकि, एक तारा SAO 206462 हमें गलत साबित करने के लिए ब्रह्मांड में मौजूद है क्योंकि इसकी दो spiral arms देखी गयी हैं। October 2011 में खोजा गया SAO 206462 तारा पृथ्वी से लगभग 460 प्रकाश वर्ष दूर Lupus (“वुल्फ”) नक्षत्र में है। तारा धूल और गैस से बनी एक बहुत विशाल circumstellar disk से घिरा हुआ है।

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यह विशाल circumstellar disk प्लूटो की orbit की चौड़ाई से लगभग दोगुनी है। well खगोल वैज्ञानिक ये जानते हैं कि जब किसी तारे की डिस्क के अंदर नए ग्रह बन रहे होते हैं तो उसके चारों ओर spiral arms विकसित हो सकती हैं। वैज्ञानिकों मानना है कि दो spiral arms, डिस्क के अंदर विकसित हो रहे दो नए ग्रहों द्वारा बनाई गई है। दरअसल यहाँ अभी एक सौरमंडल का निर्माण चल रहा है।

तारा जिसपर हैं पानी के बादल

हम जानते हैं कि सितारे बेहद गर्म होते हैं। उदाहरण के लिए, हमारे सूर्य को ही लेलें। इसकी सतह जिसे photosphere नाम से जाना जाता है उसका औसत तापमान लगभग 5,500 डिग्री सेल्सियस (10,000 डिग्री फ़ारेनहाइट) है। अब एक ऐसे तारे के बारे में सोचो जो केवल 100 डिग्री सेल्सियस (212 डिग्री फ़ारेनहाइट) का तापमान रखता हो? जी हाँ मै मजाक नही कर रहा हूँ। सिर्फ 100 डिग्री सेल्सियस, जो पानी का boiling point होता है, बस इतना ही। ये किसी भी तारे के लिए बहुत ठंडा तापमान है। लेकिन CFBDSIR 1458+10B नाम का तारा (ऊपर दाईं ओर चित्रित) यही तापमान रखता है।

ये तारा दरअसल एक बाइनरी सिस्टम का हिस्सा है। CFBDSIR 1458+10 नाम का यह बाइनरी सिस्टम, पृथ्वी से 75 से 104 प्रकाश वर्ष दूर Bootes नक्षत्र कि ओर मौजूद है। इस बाइनरी सिस्टम में मौजूद दोनों ही तारे Brown Dwarf तारे हैं। जो एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं। बड़े वाले का द्रव्यमान जहाँ 11 Jupiter द्रव्यमान तक है तो वहीँ छोटा वाला 6 से 15 Jupiter द्रव्यमान तक हो सकता है।

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Brown Dwarfs तारों का द्रव्यमान एक विशाल ग्रह और एक छोटे तारे के द्रव्यमान के बीच आता है। यह ग्रह कहे जाने के लिए बहुत भारी होते हैं, लेकिन एक सटीक तारा माने जाने के लिए बहुत हल्के होते हैं। तभी तो इन Brown Dwarfs को failed stars माना जाता है क्योंकि इनके पास गुरुत्वाकर्षण के कारण अपनी कोर में nuclear fusion के लिए पर्याप्त द्रव्यमान होता ही नही है, जो एक असल तारे कि पहचान होती है, जिससे तारे प्रकाश और गर्मी पैदा कर पाते हैं।

उस पर भी, अगर वैज्ञानिकों कि माने तो CFBDSIR 1458+10B एक Brown Dwarf कहे जाने के लिए भी बहुत ठंडा है। ज्यादातर ज्ञात Brown Dwarfs तारों का तापमान अक्सर 177 से 327 डिग्री सेल्सियस (350-620 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बीच होता है, जो देखा जाये तो CFBDSIR 1458+10B के 100 डिग्री सेल्सियस (212 डिग्री फ़ारेनहाइट) से काफी गर्म है।

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वैसे आपको जानकर हैरानी होगी की 100 डिग्री सेल्सियस तापमान रखने के बावजूद भी यह सबसे ठंडा ज्ञात Brown Dwarf तारा नहीं है। यह रिकॉर्ड यह (WISE 1828+2650) तारा होल्ड करता है। यह हमारी पृथ्वी से लगभग 33 प्रकाशवर्ष दूर Lyra नक्षत्र कि मैजूद है। वैज्ञानिको के मुताबिक इसका तापमान -23 डिग्री सेल्सियस से 127 डिग्री सेल्सियस के अंदर-अंदर है। और इसका द्रव्यमान 0.5 से लेकर 20 Jupiter द्रव्यमान के बीच है।

खैर वापस आयें इस बाइनरी सिस्टम पर तो खगोलविदों का मानना है कि CFBDSIR 1458+10B पर conditions एक नियमित Brown Dwarf की तुलना में एक बड़े ग्रह की तरह ज्यादा हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ठंडे Brown Dwarf में ऐसे बादल भी हो सकते हैं जिनमें पानी हो।

एक तारा जो हीरे वाला ग्रह बन गया

अच्छा ऐसा अक्सर नहीं होता है कि हम किसी तारे के ग्रह बनने के बारे में सुनते हैं, पूरे के पूरे हीरों से ढके ग्रह के बारे में तो बिल्कुल भी नहीं। लेकिन 25 August 2011 को वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से लगभग 4,000 प्रकाशवर्ष दूर Serpens Cauda नक्षत्र कि ओर एक millisecond pulsar का चक्कर लगाते एक ऐसे ही ग्रह को देखा।

खगोलविदों ने तारे से बने इस ग्रह की खोज तब की जब उन्हें हमारी आकाशगंगा में कुछ Pulsar सिग्नल प्राप्त हुए। Pulsar सिग्नल तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन सितारों द्वारा released, radio waves और radiation होते हैं, जो और कुछ नही मृत विशाल सितारों के ढह गए कोर हैं।

खगोलविदों को पता चला कि कुछ गड़बड़ है जब उन्होंने पाया कि Pulsar का घूमना, किसी भारी गुरुत्वाकर्षण पिंड से प्रभावित हो रहा है। इस प्रकार कि प्रभावित स्पिन सिर्फ तभी हो सकती है जब कोई एक्सोप्लैनेट Pulsar Neutron Star की परिक्रमा कर रहा हो।

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फिर बारीकी से study करने पर खगोलविदों ने close range पर तेजी से Pulsar की परिक्रमा कर रहे एक एक्सोप्लैनेट का पता लगाया। इस एक्सोप्लैनेट का द्रव्यमान भी बहुत ज्यादा दिखाई दिया था (Jupiter से थोड़ा ज्यादा) भले ही यह पृथ्वी से केवल पांच गुना बड़ा था। पहले पहल, ये ग्रह कोई सेंस बनता नही दिख रहा था। एक जबरदस्गुत गुरुत्वाकर्षण रखने वाले तारे के करीब परिक्रमा करने वाले इस एक्सोप्लैनेट में इतना ज्यादा द्रव्यमान नहीं होना चाहिए था। ये द्रव्यमान 330 पृथ्वियों जितना था, वो भी पृथ्वी से महज पांच गुना बड़े किसी पिंड में। ये समझ से परे था कि इतना ज्यादा द्रव्यमान इस tightly packed पिंड में कैसे समा गया।

खगोलविदों ने जल्द ही पता लगा कि एक्सोप्लैनेट किसी ज़माने में एक सूर्या जैसा तारा रहा था, जो बाइनरी सिस्टम का हिस्सा था। Pulsar भी एक दूसरा तारा था जो ज्यादा बड़ा और भारी था। अतीत में दोनों ने एक-दूसरे की परिक्रमा की थी। जिसके बाद, बड़ा तारा अपने जीवन को खत्म कर एक पल्सर में परिवर्तित हो गया, जब ऐसा हुआ तो किसी वजह से इसका छोटा साथी तारा इस सुपरनोवा धमाके को झेल गया।

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आगे चलकर सूर्य जैसे तारे ने भी अपने जीवन को समाप्त किया और एक सफेद बन तारे में बदल गया जिसके बाद ये दोनों तारे इतने करीब आ गए कि बड़े तारे कोर यानी Pulsar ने छोटे तारे कि कोर यानी सफेद बौने तारे से बची कुची गैस और matter को खींच लिया।

जिसके परिणाम में ये कोर एक ठंडे ग्रह में बदल गयी, जिसे हम इस Pulsar की परिक्रमा करते हुए आज देख रहे हैं। हालाँकि, इस विनाश में भी सुंदरता है। खगोलविदों का मानना है कि fusion-less ये ग्रह एक क्रिस्टलीय कार्बन से बना चुका है, वही matter जिससे हीरे बनते हैं। यानी 4,000 प्रकाशवर्ष दूर हम एक Pulsar कि परिक्रमा करते हुए, पृथ्वी से भी 5 गुना बड़े ग्रह को देख रहे हैं।

Conclusion (निष्कर्ष)

बहराल, हमारा ब्रह्मांड वाकई कईं ऐसे अजूबों से भरा पड़ा है। देर है तो बस दूरबीन उठाकर उनको देखे जाने की, ये ब्रह्मांड आपको हमेशा चौंकाने के लिए तैयार है। इस वीडियो के भाग दो में हम पांच और ऐसे तारों के बारे में जानेंगे जो ब्रह्मांड कि गहराईयों में मौजूद हैं और समझ से परे रहे हैं।

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खैर, आज के इस भाग में इतना ही, इन पांचो में से आपको किस तारे ने सबसे ज्यादा हैरान किया नीचे कमेंट करके हमें जरूर बताएं और इस पोस्ट के भाग-दो के लिए इंतजार करें, मैं आपसे जल्दी मिलूँगा इस पोस्ट के भाग दो के साथ, तब तक आप इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना ना भूलें। चलिए मैं मिलता हूं आपसे अगली पोस्ट में तब तक के लिए बाय गाइस टेक केयर।

Hello, I am Pankaj Gusain from (Space Siksha) And (YouTube channel - Into The Universe With Pankk) I have been a content creator (Youtuber and blogger) Since 2017.

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