TRAPPIST-1 के सातों ग्रह पर देखी गई भयानक गड़बड़! | Trappist 1 Latest News

नमस्कार दोस्तों! आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे Trappist 1 Latest News के बारे में। हमारे सौरमंडल से तकरीबन 40 प्रकाशवर्ष दूर साल 1999 में एक ऐसे तारे कि खोज हुई थी जो आने वाले समय में बहुत सुर्खियाँ बटोरने वाला था। जी हाँ ये था Aquarius नक्षत्र कि ओर मौजूद TRAPPIST-1 तारामंडल। क्यूंकि इसका चक्कर लगाते हुए वैज्ञानिकों को एक के बाद एक 7 पृथ्वी जैसे ग्रह मिले थे।

ये सभी सातों दुनियाएं लगभग पृथ्वी के द्रव्यमान और आकार जितनी देखी गयीं थीं। इनमे से 3 से 4 ग्रह इस तारे के habitable zone में मौजूद हैं। ये हैं TRAPPIST-1e, f, और g, अब Imagine कीजिये एक ऐसे सौरमंडल के बारे में जिनमे एक के बाद एक ज़िन्दगी से भरपूर दुनियाएं मौजूद हैं और ये दुनियाएं एक दूसरे के इतने करीब हैं कि इनके बीच यात्रा करना कुछ ऐसा हो जैसे यहाँ पृथ्वी पर एक देश से दूसरे देश जाना।

How Compact Is TRAPPIST-1?

यह एक कमाल के सपने जैसा है, इस system को देखकर ये सपना हकीकत भी लगता है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है इन सभी सातों ग्रहों का एक दूसरे के बेहद करीब होना। सवाल उठता है कि कितने करीब? वेल ये तो आप जानते ही होंगे कि हमारे सौरमंडल में सूर्य के सबसे करीब मरकरी ग्रह है जो सूर्य को लगभग 5 करोड़ 80 लाख kilometers कि औसतन दूरी से orbit करता है। पूरा TRAPPIST-1 system मरकरी की orbit के अंदर कम से कम चार बार फिट हो सकती है। ये system इतना कॉम्पैक्ट है।

लेकिन क्यूंकि TRAPPIST-1 एक लाल बौना तारा है जो ब्रह्मांड के सबसे ठन्डे main sequence तारे होते हैं। ये इतनी हीट और रौशनी produce नही कर पाते हैं। आकार में भी हमारे सूर्य से बेहद छोटे होते हैं, जिस वजह से ही इनका habitable zone इनके बहुत करीब बनता है।

वेल इस system को लेकर अभी हाल ही में जो नई स्टडी निकलकर आई है वो इस system को लेकर हमारी उत्सुकता को ख़त्म करती नजर आई है। एक नई स्टडी से पता चलता है कि यह संभव है कि इस सिस्टम में जीवन इसके किसी भी ग्रह पर मौजूद ना हो। इसकी ज्यादा संभावना है कि सभी ग्रह बंजर हों और इनका वायुमंडल छीन लिया गया हो।

Trappist system ने साल 2016-2017 में सबसे ज्यादा attention हासिल कि थी जब इस तारे के करीब ग्रह मिलने शुरू हुए थे। क्योंकि पहली नज़र में यह alien life के लिए एक perfect system लगता है। लेकिन एक सवाल यह था कि क्या लाल बौने तारे रहने योग्य दुनिया के लिए सूटेबल हो भी सकते हैं?

जैसे कि हमने बात कि, की लाल बौने तारे सूर्य की तुलना में बहुत ठंडे होते हैं, इसलिए किसी भी habitable planet को तारे की बहुत करीब से परिक्रमा करने की जरुरत होगी। वेल लाल बौने तारे अपनी एक और खासियत के लिए और ज्यादा मशहूर हैं। कि ये बेहद intense solar flares को पैदा करते हैं, जो पास के ग्रहों को एक्स-रे और दूसरे खतरों से भून सकती हैं। क्या इन ग्रहों पर मौजूद जीवन अरबों वर्षों तक इन खतरों को झेलते हुए बच सकता है? अगर ट्रैपिस्ट-1एक typical रेड ड्वार्फ है, तो जवाब होगा बिलकुल नहीं।

Trappist 1 Latest News & Updates

यह नया काम या स्टडी, ट्रैपिस्ट ग्रहों के संभावित वातावरण को देखता है। JWST की Observations ने पुष्टि की है कि इस system के दो innermost planets में किसी भी meaningful atmosphere कि कमी है, लेकिन शोधकर्ताओं को इसकी उम्मीद भी। हमारे सिस्टम में भी मरकरी ग्रह पर कोई वायुमंडल नहीं है। लेकिन आम तौर पर पहले यह सोचा गया था कि ट्रैपिस्ट-1 कि ठंडी और ज्यादा दूर की दुनियाएं, वातावरण को बनाए रख सकती हैं। इसलिए शोधकर्ताओं कि टीम ने इस system को लेकर एक कंप्यूटर सिमुलेशन पर ध्यान दिया।


TRAPPIST-1 और दूसरे लाल बौने सितारों कि observations को देखते हुए, authors ने समय के साथ तारे द्वारा उत्सर्जित होने वाली high-energy radiation की मात्रा को calculate किया। फिर उन्होंने बाहरी ट्रैपिस्ट एक्सोप्लैनेटस के संभावित, शुरुवाती वायुमंडल पर उस radiation के प्रभावों का simulate किया। इससे, उन्होंने atmospheric evaporation की दर का एक मॉडल तैयार किया।

इससे उन्हें पता चला कि समय के साथ सभी ग्रह अपना थोड़ा सा वातावरण खो देते हैं, यहाँ तक कि पृथ्वी भी। अब सवाल यह है कि कितना और कितनी जल्दी। टीम ने पाया कि ट्रैपिस्ट ग्रहों के लिए, यह जवाब बहुत ज्यादा मात्रा में और बहुत तेज गति से था।

सिमुलेशन ने दिखाया कि ट्रैपिस्ट-1 तारे के current radiation levels के आधार पर, इसके बाहरी ग्रह भी कुछ सौ मिलियन वर्षों के अंदर ही पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद जितनी गैसों को खो देंगे।

आपको बता दें कि हमारी earth, mars और venus जैसे ग्रहों के पास अपने शुरुवाती दौर में बहुत घना वातावरण था, इसलिए हम मान सकते हैं कि ट्रैपिस्ट दुनियाओं में भी ऐसा ही मोटा वातावरण रहा होगा। लेकिन क्यूंकि young red dwarfs stars और भी ज्यादा high-energy radiation छोड़ते हैं, इसलिए ट्रैपिस्ट ग्रहों पर वायुमंडल और भी तेज दर से evaporate हो जाएगा।

अब क्यूंकि ट्रैपिस्ट-1 तारा हमारे सूर्य से थोड़ा पुराना है, इस तारे कि उम्र लगभग 8 अरब वर्ष है, जिसके तहत ट्रैपिस्ट दुनियाओं पर कोई भी atmosphere संभवतः बहुत पहले ही ख़त्म हो चुका होगा।


इसलिए ट्रैपिस्ट-1 system संभवतः गर्म और dry rocks के collection से ज्यादा और कुछ नहो हो सकती हैं। और ये ज्यादातर दूसरे लाल बौने तारों वाले systems के लिए भी लागू हो सकता है। अब इससे लाल बौने तारों के करीब extraterrestrial life की संभावनाओं पर कुछ गंभीर सवाल खड़े हो उठते हैं।

हमारी आकाशगंगा में लगभग 75% तारे लाल बौने तारे ही हैं, जबकि सूर्य जैसे तारे केवल 8% हैं। अगर लाल बौने तारे अपने करीब मौजूद दुनियाओं के वायुमंडलों को छीन लेते हैं, तो ऐसे में तो ज्यदातर planetary systems, lifeless हो सकते हैं।

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तो ऐसे में अगर आप अभी अपने चारों ओर देखो, तो आप जो जीवन देख रहे हैं वह जितना हमने सोचा था उससे कहीं अधिक दुर्लभ हो सकता है। ऐसे में दूसरे लाल बौने तारामंडलों में जीवन को खोज पाने कि उम्मीद करना सही भी है या गलत, इस पर अब सवाल खड़े हो उठते हैं।

Conclusion

खैर अभी ये एक कंप्यूटर सिमुलेशन द्वारा की गई प्रेडिक्शन है यह अभी साबित नहीं हुआ है। जेम्स वेब आने वाले समय में इस system के बाकी ग्रहों को भी स्टडी करेगा। इसके बाद ही हम बेहतर नतीजे पर पहुंच सकेंगे। की क्या यह लाल बौने तारे अपने करीब मौजूद ग्रहों पर जीवन का समर्थन कर सकते हैं या नहीं।

तो Trappist 1 Latest News और इस तारामंडल को लेकर आपका क्या विचार है? क्या इस तारामंडल के करीब मौजूद ग्रहों पर जीवन हो सकता है या नहीं? नीचे कमेंट करके हमें जरूर बताएं। और इस पोस्ट से अगर आपने कुछ नया जाना हो या सीखने मिला हो तो इस पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर कीजिए अपने फ्रेंड्स और फैमिली मेंबर्स के साथ। मैं मिलता हूं आपसे एक और पोस्ट में एक नए टॉपिक के साथ तब तक के लिए ख्याल रखिएगा अपना बाय गाइस, टेक केयर, जय हिन्द!

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